अनसोयी राते
उम्र बीत
गयी
पढते
पढते
ज्ञान
भरी बाते
।
और ना जाने कितनी बीत गयी अनसोयी राते ॥
कभी कभी पन्ने पलटता हूँ अतीत की किताब के ।
और उस किताब के धुंधले पन्नो में टटोलता हूँ पन्ने इस शुरुआत के ॥
क्यूंकि जब मैं बहुत छोटा था ,तब सिर्फ हँसता था, खाता था और रोता था ।
और रात को चैन की नींद सोता था ॥
पर जैसे ही बड़ा हुआ ।
रंग बिरंगी दुनिया को देखने खड़ा हुआ ॥
मुझे पकड़ा दिया गया किताबो भरा झोला ,जिसे उठाते उठाते कंधे दुःख जाते ।
दिन तो होम वर्क से दूभर हो गया था ,पर अभी भी थी चैन भरी राते ॥
एक समय वह भी आया जब शरीर को लगने लगा की क्यूँ भोर हुआ ।
दुर्भाग्यवश मैं ऐसे समय में ही किशोर हुआ ॥
अब बस्ता कंधो से हट गया था ।
पर किताबो का वजन बढ गया था ॥
और पैर दुखने लगे थे , ट्यूशन जाने क लिए साइकिल के पैडल मारते मारते ।
पढाई के दवाब में कभी कभी आकर नमस्कार करने लगी थी अनसोयी राते ॥
जिंदगी में आंगे बढ्ने के लिए ।
आंगे पढाई करने के लिए ॥
और ना जाने कितनी बीत गयी अनसोयी राते ॥
कभी कभी पन्ने पलटता हूँ अतीत की किताब के ।
और उस किताब के धुंधले पन्नो में टटोलता हूँ पन्ने इस शुरुआत के ॥
क्यूंकि जब मैं बहुत छोटा था ,तब सिर्फ हँसता था, खाता था और रोता था ।
और रात को चैन की नींद सोता था ॥
पर जैसे ही बड़ा हुआ ।
रंग बिरंगी दुनिया को देखने खड़ा हुआ ॥
मुझे पकड़ा दिया गया किताबो भरा झोला ,जिसे उठाते उठाते कंधे दुःख जाते ।
दिन तो होम वर्क से दूभर हो गया था ,पर अभी भी थी चैन भरी राते ॥
एक समय वह भी आया जब शरीर को लगने लगा की क्यूँ भोर हुआ ।
दुर्भाग्यवश मैं ऐसे समय में ही किशोर हुआ ॥
अब बस्ता कंधो से हट गया था ।
पर किताबो का वजन बढ गया था ॥
और पैर दुखने लगे थे , ट्यूशन जाने क लिए साइकिल के पैडल मारते मारते ।
पढाई के दवाब में कभी कभी आकर नमस्कार करने लगी थी अनसोयी राते ॥
जिंदगी में आंगे बढ्ने के लिए ।
आंगे पढाई करने के लिए ॥
इंजीनियरिंग कॉलेज आया , यहाँ तो दिन छोटे महसूस होने लगे ।
और उनको पूरा करने के लिए रात के कुछ घंटे उनमे शामिल होने लगे
अब तो दिन में क्लासेज और सोना ।
रात को maggi , assignmet और मस्ती का होना ॥
कभी कभी रात बीत जाती gaming में या किसी का मजाक उड़ाते उड़ाते ।
नींदों से भरी नहीं थी पर जोशीली थी अनसोयी राते ॥
फिर इस उम्र में जो सबको होता है , मुझे भी एक बार हुआ ।
एक पागल सी , मासूम सी , सुन्दर सी , नटखट सी लड़की से प्यार हुआ ।
दिनभर घूमना फिरना ,प्यार मुहब्बत और रात गुजर जाती उसे मनाते मनाते ।
पर मन को अच्छी लगने लगी थी वो अनसोयी राते ॥
फिर शादी हई किसी से ।
पता नहीं किसी और से या जिससे प्यार किया उसी से
अब तो
जिम्मेदारीया
हरदम
थी
।
राते अनसोयी अभी भी थी पर नींद उनमे कम थी ॥
समय बीतता तो बस पैसो का हिसाब लगाते लगाते ।
तनावभरी और नींद रहित थी अनसोयी राते ॥
शरीर अब बलहीन हो के झुकने लगा था ।
मैं दो कदम चल के रुकने लगा था ॥
बलों का रंग अनायास ही सफ़ेद हो गया ।
और पता ही नहीं चला कब बुढापा दस्तक दे गया ॥
अब समझ गया था की बूढ़े क्यूँ है सठियाते ।
क्यूंकि अब उनके पास समय है , लेकिन तनाव उससे ज्यादा
घुटनों का दर्द हद से ज्यादा
high B. P. और शुगर तो दिन रात साथ निभाते
जिंदगी में सिर्फ एक ही चीज बची होती है, वो है अनसोयी राते ॥
राते अनसोयी अभी भी थी पर नींद उनमे कम थी ॥
समय बीतता तो बस पैसो का हिसाब लगाते लगाते ।
तनावभरी और नींद रहित थी अनसोयी राते ॥
शरीर अब बलहीन हो के झुकने लगा था ।
मैं दो कदम चल के रुकने लगा था ॥
बलों का रंग अनायास ही सफ़ेद हो गया ।
और पता ही नहीं चला कब बुढापा दस्तक दे गया ॥
अब समझ गया था की बूढ़े क्यूँ है सठियाते ।
क्यूंकि अब उनके पास समय है , लेकिन तनाव उससे ज्यादा
घुटनों का दर्द हद से ज्यादा
high B. P. और शुगर तो दिन रात साथ निभाते
जिंदगी में सिर्फ एक ही चीज बची होती है, वो है अनसोयी राते ॥
अब जीतनी
भी
कोशिश
करू
जिंदगी
अधूरी
है
।
क्यूंकि बहुत सालो से नींद नहीं हुयी पूरी है ॥
अब मौत से डरता नहीं , उसका इन्तजार करता हूँ ।
और हमेशा के लिए चैन की नींद सोने का बिस्तर तैयार करता हूँ ॥
क्यूंकि बहुत सालो से नींद नहीं हुयी पूरी है ॥
अब मौत से डरता नहीं , उसका इन्तजार करता हूँ ।
और हमेशा के लिए चैन की नींद सोने का बिस्तर तैयार करता हूँ ॥
Awesomest Poem
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